नई दिल्ली
भारतीय क्रिकेट के ‘हिटमैन’ रोहित शर्मा आज (30 अप्रैल) 39 साल के हो गए. रिकॉर्ड्स की चमक, कप्तानी की ठसक और बल्लेबाजी की सहजता… रोहित का करियर कई रंगों से बना है. लेकिन इस कहानी की सबसे दिलचस्प शुरुआत किसी स्टेडियम से नहीं, बल्कि एक बिल्डिंग की खिड़कियों से होती है. 2017 में टीवी होस्ट गौरव कपूर के शो Breakfast with Champions में रोहित ने अपने बचपन का एक किस्सा सुनाया था, जो आज भी उतना ही जीवंत लगता है.
मुंबई की उस बिल्डिंग में, जहां रोहित बड़े हुए, क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं, रोजमर्रा की आदत थी. खुद रोहित के शब्दों में, ’24 घंटे नहीं, तो कम से कम 16 घंटे हम क्रिकेट देखते थे.’ परिवार में चाचा-बुआ तक क्रिकेट खेल चुके थे और चाचा उनकी बल्लेबाजी पर इतनी बारीकी से नजर रखते थे कि छत पर खड़े होकर उनकी हर शॉट को परखते थे.
…लेकिन यह जुनून कभी-कभी मुसीबत भी बन जाता था. बिल्डिंग के अंदर खेलते हुए रोहित और उनके दोस्तों ने कई बार पड़ोसियों की खिड़कियों के शीशे तोड़ दिए. शिकायतें बढ़ीं, नाराजगी भी. आखिरकार मामला पुलिस तक पहुंचा. एक दिन पुलिस आई और सख्त लहजे में चेतावनी दे गई, ‘अगर दोबारा ऐसा किया, तो जेल में डाल देंगे.’
उस चेतावनी के बाद मैदान का रुख जरूर किया गया, लेकिन बिल्डिंग क्रिकेट पूरी तरह खत्म नहीं हुआ. यही जिद, यही लगन उस बच्चे को आगे बढ़ाती रही, जो आगे चलकर दुनिया के सबसे खतरनाक ओपनरों में गिना गया.
रोहित शर्मा का नाम आते ही जो आंकड़ा सबसे पहले याद आता है, वह है- 264. 2014 में श्रीलंका के खिलाफ खेली गई यह पारी आज भी वनडे क्रिकेट की सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी है. इससे पहले 209 और बाद में एक और दोहरा शतक (208*)…रोहित ने तीन डबल सेंचुरी जड़कर उस मुकाम को छुआ, जहां पहुंचना आज भी किसी भी बल्लेबाज के लिए सपना है.
उनकी बल्लेबाजी की खासियत सिर्फ बड़े स्कोर नहीं, बल्कि उसे हासिल करने का अंदाज है- सहज, संतुलित और समय पर आधारित. रोहित की टाइमिंग को अक्सर ‘कला’ कहा जाता है और 264 उस कला की सबसे बड़ी मिसाल है.
धीमी शुरुआत, लेकिन ठोस वापसी
आज भले ही रोहित का नाम महान बल्लेबाजों में लिया जाता हो, लेकिन शुरुआत आसान नहीं थी. टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने पहले दो मैचों में शतक जरूर जड़े, लेकिन इसके बाद लंबा संघर्ष चला. अगली 16 पारियों में सिर्फ दो बार 50+ का स्कोर- यह आंकड़ा बताता है कि उन्हें खुद को साबित करने में कितना वक्त लगा.
असल मोड़ 2013 में आया, जब उन्हें वनडे में ओपनिंग का मौका मिला. चैम्पियंस ट्रॉफी में लगातार अर्धशतक और फिर उसी साल ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 209…यह वह दौर था, जब रोहित ने खुद को नए रूप में स्थापित किया.यहीं से ‘हिटमैन’ की कहानी ने रफ्तार पकड़ी.
व्हाइट-बॉल का बादशाह, टेस्ट में भी चमक
रोहित शर्मा को अक्सर सीमित ओवरों का दिग्गज कहा जाता है, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में भी उन्होंने कई यादगार पारियां खेलीं. साउथ अफ्रीका के खिलाफ 176, 127 और 212 जैसे स्कोर उनके टेस्ट करियर के सुनहरे पन्ने हैं. वहीं 2021 में चेन्नई में इंग्लैंड के खिलाफ 161 रनों की पारी ने दिखाया कि मुश्किल परिस्थितियों में भी वह कितने भरोसेमंद हैं.
हालांकि 2024 के बाद उनका टेस्ट करियर ढलान पर गया और उसी साल उन्होंने इस फॉर्मेट को अलविदा कह दिया. लेकिन जो छाप उन्होंने छोड़ी, वह लंबे समय तक याद रखी जाएगी.
वर्ल्ड कप: बल्लेबाज और कप्तान- दो अलग कहानियां
2019 वर्ल्ड कप में रोहित शर्मा ने पांच शतक जड़कर 600 से ज्यादा रन बनाए.यह किसी भी बल्लेबाज के लिए सपना जैसा प्रदर्शन है. लेकिन 2023 में उनका रोल बदल चुका था. इस बार वह सिर्फ रन बनाने वाले खिलाड़ी नहीं, बल्कि टीम के कप्तान थे. 597 रनों के साथ उन्होंने भारत को फाइनल तक पहुंचाया. 2024 में भारत का टी20 वर्ल्ड कप खिताब उन्हीं की कप्तानी में और 2025 की चैम्पियंस ट्रॉफी भी उन्हीं के रहते मिली.
यहां रोहित का दूसरा रूप सामने आया- एक ऐसा कप्तान, जो टीम को आगे रखता है और खुद उदाहरण बनकर नेतृत्व करता है.
आईपीएल में ‘मास्टरमाइंड’ कप्तान
अगर फ्रेंचाइजी क्रिकेट की बात करें, तो Mumbai Indians के साथ रोहित शर्मा का नाम एक सफल कप्तान के रूप में दर्ज है. 2013 से 2020 के बीच टीम को पांच बार खिताब दिलाना- यह सिर्फ एक उपलब्धि नहीं, बल्कि उनकी रणनीतिक समझ का प्रमाण है. रोहित ने न सिर्फ बल्लेबाज के रूप में, बल्कि कप्तान के तौर पर भी टीम को ऊंचाइयों तक पहुंचाया.
रोहित शर्मा की कहानी सीधी नहीं है. इसमें संघर्ष है, ठहराव है और फिर विस्फोट है. बिल्डिंग में क्रिकेट खेलते हुए खिड़कियों के शीशे तोड़ने वाला बच्चा… आज क्रिकेट इतिहास के सबसे बड़े स्कोर का मालिक है.
39 साल की उम्र में भी रोहित की विरासत सिर्फ आंकड़ों में नहीं, बल्कि उस अंदाज में है, जिससे उन्होंने खेल को खूबसूरत बनाया. और यही वजह है कि ‘हिटमैन’ सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि एक अनुभव है.
